
तू पास थी फिर भी दूरी रही, हँसी में भी कोई मजबूरी रही। हम सच बोलते रहे हर दफ़ा, तेरी खामोशी ही सबसे भारी रही। मैं हर रोज़ तुझमें खोता गया, तू हर रोज़ मुझसे थोड़ा गया। जिसे अपना घर समझा मैंने, वहीं से दिल मेरा टूटा गया। हम आज भी तेरा नाम लेते हैं, और आँसू छुपा के मुस्काते हैं। तू पूछती है— “अब दर्द कैसा है?” हम कहते हैं— “ठीक है”, और टूट जाते हैं। तेरे वादे किताबों जैसे थे, सुंदर… मगर कभी पूरे नहीं। मैंने तुझको खुद से ज़्यादा चाहा, पर मेरे हिस्से में तू आई नहीं। तेरी यादें आज भी बोलती हैं, खामोशी में ज़ोर से रोती हैं। मैं सो जाऊँ अगर एक पल को भी, तेरी तस्वीरें नींदें तोड़ती हैं हम आज भी तेरा नाम लेते हैं, और आँसू छुपा के मुस्काते हैं। तू पूछती है— “अब दर्द कैसा है?” हम कहते हैं— “ठीक है”, और टूट जाते हैं। अगर फिर से मिलना लिखा होता, तो शायद हम कुछ अलग होते। पर जो अधूरा रह गया हमारे बीच, वही आज हमारी पूरी कहानी होते।

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